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02 October 2005

दुइ मुक्तक (हिन्दी)

इश्क कहते है इश्क मे आंखो से निंद उड जाती है कोई हमसे भी इश्क करे कमबख्त निंद बहुत आती है ! रोक दो मेरे ज़नाजे को..... रोक दो मेरे ज़नाजे को,मेरी जान आ गयी है पिछे मुडकर देखो जरा, दारू की दुकान आ गयी है बोतल छुपा दो कफन मे मेरे, कब्र मे लेटा पिया करुँगा जब मांगेगा हिसाब खुदा तो, जाम बना कर दिया करुँगा. आशीष कुमार

2 Comments:

At 27 December, 2005, Blogger Pratik said...

बहुत बढिया

 
At 19 November, 2006, Anonymous Anonymous said...

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