प्रथम नेपाली साहित्यक ब्लग पत्रीका "सयपत्री"को लागी रचना एवं
सल्लाह सुझाब प्रतिक्रिया भए यहां क्लिक गरेर मेल पठाउनु होला-
हिन्दी गजल
--- ग़ज़ल---
ज़लालत है ज़िदगी क्या छोड़ देना चाहिए
अब अंधी गली में कोई मोड़ देना चाहिए
क्या मिला उस बुत पे घंटियाँ टुनटुनानसे
मिथ्या संस्कारों को अब तोड़ देना चाहिए
कब तक रहोगे किसी के रहमो-करम
पेज़ेहाद का कोई नारियल फोड़ देना चाहिए
क्यों नहीं हो सकतीं अपनी एक ही दीवारें
खंडित आस्थाओं को अब जोड़ देना चाहिए
बहुत शातिराना चालें हैं तेरी बेईमान
रविकहता है कहीं तो कोई होड़ देना चाहिए
रविरतलामी (भारत)
5 Comments:
अपने ब्लॉग स्थल पर मेरी ग़ज़ल प्रकाशित करने के लिए धन्यवाद!
रवि जी:
बहुत सुन्दर और तीखी गज़ल है । बधाई ..
अनूप
ravi jii,
bahut achchhii ghazal hai. badhaaii.
Hey I want to welcome all the people to this blog site at atktm.co.nr click this link to go to the @ktm Blog
BEKAR HAI
SHIK KE AANA
Post a Comment
<< Home